Showing posts with label कविता कोना. Show all posts
Showing posts with label कविता कोना. Show all posts

Friday, 10 July 2015

बाल कविता - ' मैया, मैं भी कृष्ण बनूँगा ' - त्रिलोक सिंह ठकुरेला


बाल कविता - ' मैया, मैं भी कृष्ण बनूँगा '

                                                     -  त्रिलोक सिंह ठकुरेला

मैया, मैं भी कृष्ण बनूँगा
बंशी, मुझे दिलाना माँ।
अच्छा लगता गाय चराना,
मुझको गोकुल जाना, माँ॥

ग्वालों के संग में खेलूँगा,
यमुना बीच नहाऊँगा।
नाथूंगा मैं विषधर काले,
गेंद छुड़ाकर लाऊँगा॥

चोरी चुपके माखन खाकर
शक्तिवान बन जाऊँगा।
मारूँगा मैं असुर कई,
फिर सुरपुर कंस पठाऊँगा॥

राधा के संग भी खेलूँगा,
पर बंशी न दिखाऊँगा।
नाचूँगा मैं दे दे ताली,
सबको खूब रिझाऊँगा॥

Wednesday, 8 July 2015

रामधारी सिंह "दिनकर" की लोकप्रिय बाल कविता - ' चांद का कुर्ता '

रामधारी सिंह "दिनकर" की लोकप्रिय बाल कविता -  ' चांद का कुर्ता '

 

एक बार की बात, चंद्रमा बोला अपनी माँ से
"कुर्ता एक नाप का मेरी, माँ मुझको सिलवा दे
नंगे तन बारहों मास मैं यूँ ही घूमा करता
गर्मी, वर्षा, जाड़ा हरदम बड़े कष्ट से सहता।"

माँ हँसकर बोली, सिर पर रख हाथ,
चूमकर मुखड़ा

"बेटा खूब समझती हूँ मैं तेरा सारा दुखड़ा
लेकिन तू तो एक नाप में कभी नहीं रहता है
पूरा कभी, कभी आधा, बिलकुल न कभी दिखता है"

"आहा माँ! फिर तो हर दिन की मेरी नाप लिवा दे
एक नहीं पूरे पंद्रह तू कुर्ते मुझे सिला दे।"

महावीर प्रसाद द्विवेदी जी की बाल कविता - 'कोकिल'

महावीर प्रसाद द्विवेदी जी की बाल कविता - 'कोकिल'

कोकिल अति सुन्दर  चिड़िया है,

सच कहते हैं अति बढ़िया है।

जिस रगत के कुवर कन्हाई,

उसने भी वह रगत पाई।

बौरों की सुगध की भाती,

कुहू-कुहू यह सब दिन गाती।

मन प्रसन्न होता है सुनकर,

इसके मीठे बोल मनोहर।

मीठी तान कान में ऐसे,

आती है वशीधुनि जैसे।

सिर ऊंचा कर मुख खोलै है,

कैसी मृदु बानी बोलै है!

इसमें एक और गुण भाई,

जिससे यह सबके मन भाई।

यह खेतों के कीड़े सारे,

खा जाती है बिना बिचारे।

 

कोकिल अति सुन्दर चिड़िया है,

सच कहते हैं अति बढ़िया है।

कहां रहेगी चिड़िया - महादेवी वर्मा

  कहां रहेगी चिड़िया 

                                     - महादेवी वर्मा

 

आंधी आई जोर-शोर से
डाली टूटी है झकोर से
उड़ा घोंसला बेचारी का
किससे अपनी बात कहेगी
अब यह चिड़िया कहाँ रहेगी ?

घर में पेड़ कहाँ से लाएँ
कैसे यह घोंसला बनाएँ
कैसे फूटे अंडे जोड़ें
किससे यह सब बात कहेगी
अब यह चिड़िया कहाँ रहेगी ?

लोकप्रिय बाल कविता - कौन? - सोहनलाल द्विवेदी

  कौन?

                कवि-  श्री सोहनलाल द्विवेदी

किसने बटन हमारे कुतरे?
किसने स्‍याही को बिखराया?
कौन चट कर गया दुबक कर
घर-भर में अनाज बिखराया?


दोना खाली रखा रह गया
कौन ले गया उठा मिठाई?
दो टुकड़े तसवीर हो गई
किसने रस्‍सी काट बहाई?



कभी कुतर जाता है चप्‍प्ल
कभी कुतर जूता है जाता,
कभी खलीता पर बन आती
अनजाने पैसा गिर जाता



किसने जिल्‍द काट डाली है?
बिखर गए पोथी के पन्‍ने।
रोज़ टाँगता धो-धोकर मैं
कौन उठा ले जाता छन्‍ने?



कुतर-कुतर कर कागज़ सारे
रद्दी से घर को भर जाता।
कौन कबाड़ी है जो कूड़ा
दुनिया भर का घर भर जाता?



कौन रात भर गड़बड़ करता?
हमें नहीं देता है सोने,
खुर-खुर करता इधर-उधर है
ढूँढा करता छिप-छिप कोने?



रोज़ रात-भर जगता रहता
खुर-खुर इधर-उधर है धाता
बच्‍चों उसका नाम बताओ
कौन शरारत यह कर जाता?

Contributors